सरस्वती शिशु मंदिर खोडरी में ग्रामीण विद्यालयों के आचार्यों का एकदिवसीय आवर्ती प्रशिक्षण संपन्न, 14 विद्यालयों के करीब 70 आचार्यों ने लिया प्रशिक्षण; गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संस्कृत शिक्षण और शिशु वाटिका की गतिविधियों पर दिया गया विशेष जोर

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। सरस्वती ग्राम शिक्षा समिति, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के अंतर्गत संचालित 14 ग्रामीण विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, आचार्य एवं आचार्य बहनों का एकदिवसीय आवर्ती प्रशिक्षण कार्यक्रम सरस्वती शिशु मंदिर खोडरी में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में लगभग 70 आचार्य एवं आचार्य बहनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।


विद्या भारती की योजना के अनुसार आयोजित होने वाला यह आवर्ती प्रशिक्षण प्रत्येक माह आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना, शिक्षण पद्धति को प्रभावी बनाना तथा आचार्यों की दक्षता में निरंतर वृद्धि करना है। प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों की शिक्षण विधियों एवं शिक्षा के अन्य आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता पर दिया जोर

कार्यक्रम के प्रथम कालखंड में उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान जिला सचिव प्रकाश नामदेव ने आवर्ती प्रशिक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए आचार्यों का निरंतर प्रशिक्षण और अपनी शिक्षण पद्धति को समयानुकूल बनाना आवश्यक है। उन्होंने सभी आचार्यों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को विद्यालयों में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।
संस्कृत एवं शिशु वाटिका की शिक्षण विधियों का दिया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के आगामी सत्रों में संस्कृत विषय की शिक्षण पद्धति पर विशेष रूप से जानकारी दी गई। पसान विद्यालय की संस्कृत आचार्या द्वारा संस्कृत के बोलचाल में उपयोग होने वाले शब्दों तथा बच्चों को सरल एवं प्रभावी तरीके से संस्कृत पढ़ाने की विधि का विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया गया।
वहीं शिशु वाटिका से जुड़े प्रशिक्षण में आचार्यों को शिशु गीत, खेल-खेल में शिक्षा तथा नृत्य के माध्यम से बच्चों को गिनती, पहाड़े एवं अन्य आवश्यक बातें सिखाने की विधियों से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान गतिविधि आधारित शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया, जिससे छोटे बच्चों के लिए पढ़ाई को सहज, रुचिकर और प्रभावी बनाया जा सके।
शिक्षा की गुणवत्ता और आचार्यों की दक्षता बढ़ाने का संकल्प
समापन अवसर पर जिला सचिव प्रकाश नामदेव ने विद्या भारती की योजनाओं के अनुरूप कार्य करते हुए सरस्वती शिशु मंदिरों में शिक्षा की गुणवत्ता एवं आचार्यों की दक्षता को और बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभव एवं शिक्षण विधियों का लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचना ही इस आयोजन की वास्तविक सफलता है।
इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर खोडरी के प्राचार्य ब्रह्मानंद पांडे, पसान विद्यालय के प्राचार्य संतोष पटेल, जिला समन्वयक के रूप में कार्य कर रहे जितेंद्र राठौर, अन्य विद्यालयों के प्रधानाचार्य सत्यनारायण सोनवानी सहित विषय प्रमुख आचार्य उपस्थित रहे।
स्थानीय विद्यालय के पदाधिकारी छेदीलाल केसरवानी एवं मूलचंद ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। प्रशिक्षण की समस्त व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे व्यवस्थापक विश्वनाथ रजक ने आभार प्रदर्शन किया। लगभग शाम 4 बजे शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रशिक्षण में शामिल सभी आचार्य एवं आचार्य बहनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों के हित में उपयोग करने का संकल्प लिया।









